ओपन पोर्स को हमेशा के लिए 70% तक छोटा करने के 3 साइंटिफिक तरीके

छोटा जवाब: ओपन पोर्स का साइज़ जेनेटिक होता है, इसलिए उन्हें हमेशा के लिए बंद नहीं किया जा सकता। लेकिन तीन चीज़ें उन्हें काफी कम दिखा सकती हैं — नियासिनामाइड और सैलिसिलिक एसिड से तेल कंट्रोल करना, रेटिनॉल से कोलेजन बढ़ाना, और रोज़ सनस्क्रीन से उस कोलेजन को बचाना।

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रेटिनॉइड्स पर हुई स्टडीज़ में पोर्स के एरिया में लगभग 22 से 25 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है, और नियासिनामाइड से करीब 20 प्रतिशत तक सुधार। तीनों साथ चलें और क्लिनिक ट्रीटमेंट जुड़े, तो फर्क और बड़ा होता है। असर 8 से 12 हफ्तों में दिखना शुरू होता है।

ओपन पोर्स क्या होते हैं?

आईने के बहुत पास जाकर देखिए। नाक, गालों और ठोड़ी पर जो छोटे-छोटे गड्ढे दिखते हैं, वही पोर्स हैं।

ये कोई खराबी नहीं है। हर इंसान की स्किन पर हज़ारों पोर्स होते हैं, और इन्हीं के रास्ते पसीना और स्किन का नैचुरल तेल बाहर आता है। अगर ये न हों तो शरीर पसीना ही नहीं निकाल पाएगा।

Steam to Open Pores - ओपन पोर्स क्या होते हैं?

दिक्कत तब शुरू होती है जब ये ज़रूरत से ज़्यादा दिखने लगते हैं। मेकअप उनमें भरकर बैठ जाता है, फोटो में स्किन खुरदुरी लगती है, और दोपहर तक चेहरा चिपचिपा हो जाता है। भारत जैसे गर्म और उमस वाले मौसम में ये शिकायत सबसे आम स्किन कंसर्न में से एक है।

ओपन पोर्स बड़े क्यों दिखते हैं? 5 मुख्य कारण

लगभग हर केस इन्हीं 5 वजहों में से किसी एक या दो में आता है।

1. जेनेटिक्स

सबसे बड़ी वजह यही है। अगर आपकी मम्मी या पापा के पोर्स बड़े हैं, तो आपके भी होने की संभावना ज़्यादा है। ऑयली स्किन वालों में ये और दिखते हैं।

2. ज़्यादा सीबम

तेल और डेड स्किन मिलकर पोर्स के अंदर एक प्लग बना देते हैं। यही प्लग पोर्स की दीवारों को अंदर से खींचकर फैला देता है। ब्लैकहेड्स इसी का नतीजा हैं।

3. कोलेजन की कमी

उम्र के साथ स्किन में कोलेजन घटता है। पोर्स के चारों तरफ की स्किन ढीली पड़ जाती है, तो छेद फैला हुआ लगने लगता है।

4. सन डैमेज

UVA किरणें कोलेजन को सीधे तोड़ती हैं। यही वजह है कि धूप में ज़्यादा रहने वालों में ढीलापन जल्दी आता है।

5. मुंहासे और एक्ने स्कार

कुछ तरह के एक्ने पोर्स को स्थायी रूप से फैला देते हैं। कई बार जो बड़े पोर्स लगते हैं, वो असल में पुराने मुंहासों के निशान होते हैं।

क्या ओपन पोर्स हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं?

ये बात पहले साफ कर लेनी ज़रूरी है, क्योंकि ज़्यादातर जगह ये नहीं बताई जाती।

पोर्स दरवाज़े नहीं हैं। उनके चारों तरफ कोई मांसपेशी नहीं होती, इसलिए वो खुल या बंद नहीं हो सकते। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी का साफ कहना है कि पोर्स का साइज़ मुख्य रूप से जेनेटिक होता है, लेकिन सही स्किन केयर से उन्हें काफी कम दिखाया जा सकता है।

तो 70 प्रतिशत कम का मतलब क्या है? मतलब है कि वो कम दिखेंगे। और ये पूरी तरह मुमकिन है, क्योंकि पोर्स असल में तीन वजहों से बड़े दिखते हैं — ज़्यादा तेल, कम कोलेजन, और सन डैमेज। तीनों ठीक की जा सकती हैं।

नीचे दिए तीनों तरीके इन्हीं तीन वजहों को एक-एक करके पकड़ते हैं। और हां, रूटीन छोड़ते ही असर वापस जाने लगता है। ये दवा नहीं, आदत है।

तरीका 1: नियासिनामाइड और सैलिसिलिक एसिड से तेल कंट्रोल करें

ये तरीका ज़्यादा सीबम और बंद पोर्स, दोनों पर काम करता है।

Salicylic Acid for Face - How to Use, and Side Effects (2)

नियासिनामाइड पोर्स पर कैसे काम करता है

नियासिनामाइड विटामिन B3 का रूप है। ये स्किन के ऑयल प्रोडक्शन को कंट्रोल करता है और स्किन बैरियर को मज़बूत करता है। तेल कम बनेगा, तो पोर्स अंदर से कम फूलेंगे।

रिसर्च में लगातार इस्तेमाल से पोर्स की दिखावट में लगभग 20 प्रतिशत तक सुधार देखा गया है। नंबर छोटा लगता है, लेकिन आईने में साफ दिखता है।

इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे धूप में सेंसिटिविटी नहीं बढ़ती और सेंसिटिव स्किन पर भी आसानी से चल जाता है।

नियासिनामाइड इस्तेमाल करने का सही तरीका

5 प्रतिशत वाला सीरम शुरुआत के लिए सही है। 10 प्रतिशत से ऊपर जाने पर फायदा नहीं बढ़ता, बल्कि कुछ लोगों में जलन और चेहरा लाल होने की शिकायत आती है।

सुबह चेहरा धोने के बाद, मॉइस्चराइज़र से पहले लगाइए। दो-तीन बूंद पूरे चेहरे के लिए काफी हैं।

सीरम चुनने में उलझन हो तो ग्लोइंग स्किन के लिए बेस्ट फेस सीरम की लिस्ट देख लीजिए, उसमें नियासिनामाइड वाले ऑप्शन भी हैं।

सैलिसिलिक एसिड पोर्स के अंदर क्या करता है

नियासिनामाइड नया तेल बनने से रोकता है। सैलिसिलिक एसिड पहले से जमा गंदगी निकालता है। दोनों का काम अलग है।

ये एक बीटा हाइड्रॉक्सी एसिड है जो तेल में घुलता है। इसका मतलब ये सिर्फ सतह पर नहीं रुकता, बल्कि पोर्स के अंदर जाकर तेल और डेड स्किन का जमा प्लग घोल देता है। वही प्लग जो पोर्स की दीवारों को खींच रहा था।

सैलिसिलिक एसिड इस्तेमाल करने का सही तरीका

1 से 2 प्रतिशत कॉन्संट्रेशन, हफ्ते में दो या तीन बार, रात को। पूरे चेहरे पर नहीं — सिर्फ नाक, ठोड़ी और माथे पर, यानी T-ज़ोन में, जहां पोर्स सबसे ज़्यादा दिखते हैं।

एक ज़रूरी बात: सैलिसिलिक एसिड और रेटिनॉल एक ही रात में मत लगाइए। अलग-अलग दिन बांट लीजिए, वरना स्किन छिलने लगेगी।

तरीका 2: रेटिनॉल से कोलेजन बढ़ाएं

अगर तीनों में से सिर्फ एक चीज़ चुननी हो, तो यही चुनिए।

रेटिनॉल पोर्स कैसे छोटे दिखाता है

रेटिनॉल विटामिन A का रूप है और ये दो काम एक साथ करता है। पहला, ये स्किन सेल्स का टर्नओवर तेज़ करता है, जिससे पोर्स के अंदर प्लग बनना कम होता है। दूसरा, ये स्किन की गहरी परत में कोलेजन बनाता है। कोलेजन बढ़ने से पोर्स की दीवारों को अंदर से सहारा मिलता है और वो सिकुड़ी हुई दिखती हैं।

तरीका 2: रेटिनॉल से कोलेजन बढ़ाएं

आंकड़ा ये है: रेटिनॉइड्स जैसे ट्रेटिनोइन और टैज़ारोटीन पर हुई स्टडीज़ में पोर्स के एरिया में करीब 22 से 25 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। यही वजह है कि अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी बड़े पोर्स के लिए रेटिनॉल की सलाह देती है, खासकर तब जब स्किन ऑयली हो, हल्के मुंहासे हों, या स्किन पहले जैसी टाइट न लगती हो।

रेटिनॉल शुरू करने का 8 हफ्ते का शेड्यूल

ज़्यादातर लोग रेटिनॉल इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि पहले हफ्ते में ही बहुत तेज़ शुरुआत कर देते हैं और स्किन छिलने लगती है। धीरे चलिए।

हफ्ताकितनी बारकॉन्संट्रेशन
1 से 2हफ्ते में 2 रात0.1 से 0.2 प्रतिशत
3 से 4हफ्ते में 3 रात0.2 से 0.3 प्रतिशत
5 से 8एक रात छोड़कर एक रात0.3 से 0.5 प्रतिशत
8 के बादरोज़ रात, अगर स्किन सह ले0.5 प्रतिशत

अगर जलन हो तो सैंडविच तरीका अपनाइए — पहले मॉइस्चराइज़र, फिर रेटिनॉल, फिर दोबारा मॉइस्चराइज़र। असर थोड़ा धीमा होगा लेकिन स्किन खराब नहीं होगी।

रात के रूटीन में सही क्रीम चुनने के लिए ड्राई और नॉर्मल स्किन के लिए बेस्ट फेस क्रीम वाली गाइड काम आएगी, क्योंकि रेटिनॉल के साथ अच्छा मॉइस्चराइज़र ज़रूरी है।

रेटिनॉल इस्तेमाल करते समय 3 गलतियां

रेटिनॉल सुबह मत लगाइए, धूप में ये टूट जाता है।

प्रेग्नेंसी या ब्रेस्टफीडिंग में डॉक्टर से पूछे बिना बिल्कुल मत लगाइए।

एक ही रात में रेटिनॉल, विटामिन C और एसिड — तीनों मत लगाइए।

तरीका 3: रोज़ सनस्क्रीन से कोलेजन बचाएं

ये तरीका सबसे बोरिंग लगता है और यही सबसे ज़्यादा छोड़ा जाता है।

सनस्क्रीन का पोर्स से क्या कनेक्शन है

सोचिए। तरीका 2 में आप कोलेजन बना रही हैं। लेकिन अगर रोज़ बिना सनस्क्रीन के बाहर निकलती हैं, तो UVA किरणें उसी कोलेजन को तोड़ती रहेंगी। ये बाल्टी में पानी भरने जैसा है जिसमें नीचे छेद हो।

भारत में UV इंडेक्स साल भर ऊंचा रहता है। दिसंबर में भी, बादलों में भी।

सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका और मात्रा

SPF 30 या उससे ज़्यादा, जिस पर broad spectrum लिखा हो। मात्रा दो उंगलियों की लंबाई जितनी होनी चाहिए – ज़्यादातर लोग इसका एक तिहाई ही लगाते हैं, इसीलिए असर नहीं दिखता। बाहर रहने पर हर तीन घंटे में दोबारा लगाइए।

Sunscreen - सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका और मात्रा

ऑयली स्किन के लिए जेल बेस्ड और नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन चुनिए, ताकि वो खुद पोर्स बंद न कर दे। अपनी स्किन टोन के हिसाब से सही SPF और फिनिश चुनने में सांवली त्वचा के लिए स्किनकेयर गाइड मदद करेगी, उसमें बिना व्हाइट कास्ट वाले ऑप्शन भी बताए गए हैं।

ओपन पोर्स के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट ट्रीटमेंट

अगर तीन से चार महीने सही रूटीन चलाने के बाद भी फर्क न दिखे, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलिए। सच कहें तो 70 प्रतिशत के आसपास वाला सुधार यहीं से आता है — घर का रूटीन और प्रोफेशनल ट्रीटमेंट, दोनों मिलकर।

NCBI पर मौजूद रिव्यू के मुताबिक केमिकल पीलिंग पोर्स के फैलाव को कम करने में मदद करती है, क्योंकि AHA और BHA एपिडर्मल सेल टर्नओवर बढ़ाकर स्किन की मरम्मत शुरू करते हैं।

कौन सा ट्रीटमेंट किसके लिए है

ट्रीटमेंटकैसे काम करता हैकितने सेशन
केमिकल पीलऊपरी परत हटाकर सेल टर्नओवर तेज़ करती है4 से 6, हर 3 से 4 हफ्ते
माइक्रोनीडलिंगकोलेजन बनने की प्रक्रिया शुरू करती है3 से 4, हर 4 से 6 हफ्ते
फ्रैक्शनल RF माइक्रोनीडलिंगकोलेजन और सीबम, दोनों पर असर3 से 5
लेज़र रिसर्फेसिंगस्किन का टेक्सचर सुधारती हैडॉक्टर तय करेंगे
ओरल आइसोट्रेटिनोइनतेल की ग्रंथियों को सिकोड़ती है, सिर्फ गंभीर मामलों मेंडॉक्टर की पर्ची पर

भारतीय स्किन टोन के लिए ज़रूरी सावधानी

माइक्रोनीडलिंग और लेज़र सिर्फ ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट से कराइए। भारतीय स्किन टोन में गलत सेटिंग से पिगमेंटेशन हो जाता है, जो पोर्स से बड़ी समस्या बन जाती है।

ओपन पोर्स के लिए 8 हफ्ते का डेली रूटीन

सुबह का रूटीन

जेंटल नॉन-कॉमेडोजेनिक क्लींज़र, गुनगुने पानी से। फिर नियासिनामाइड 5 प्रतिशत सीरम। फिर हल्का ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र। आखिर में सनस्क्रीन SPF 30 या उससे ज़्यादा।

रात का रूटीन, दिन के हिसाब से

सोमवार, बुधवार, शुक्रवार: मेकअप हो तो डबल क्लींज़। फिर रेटिनॉल, ऊपर वाली टेबल के हिसाब से। फिर मॉइस्चराइज़र।

मंगलवार और शनिवार: क्लींज़र। फिर सैलिसिलिक एसिड, सिर्फ T-ज़ोन पर। फिर मॉइस्चराइज़र।

गुरुवार और रविवार: सिर्फ क्लींज़र और मॉइस्चराइज़र। स्किन को आराम दीजिए।

प्रोग्रेस कैसे ट्रैक करें

एक छोटी सी आदत डाल लीजिए। आज एक फोटो लीजिए, फिर हर दो हफ्ते बाद। हमेशा एक ही रोशनी में, बिना मेकअप के। रोज़ आईने में देखने से फर्क कभी नहीं दिखता, फोटो में दिखता है।

ओपन पोर्स बढ़ाने वाली 7 आम गलतियां

ठंडे पानी या बर्फ से पोर्स बंद करना। ठंड से खून की नसें कुछ मिनट के लिए सिकुड़ती हैं और स्किन टाइट लगती है। पंद्रह-बीस मिनट बाद सब वापस वैसा ही। पोर्स पर कोई स्थायी असर नहीं है।

भाप लेकर पोर्स खोलना। पोर्स खुलते-बंद नहीं होते। भाप सिर्फ प्लग को नरम करती है, और ज़्यादा गर्मी स्किन में जलन पैदा करके पोर्स को और उभार देती है।

पोर स्ट्रिप्स। ये ऊपर बैठा ब्लैकहेड खींच लेती हैं, लेकिन नीचे का फैला हुआ छेद वैसा ही रहता है और चौबीस से अड़तालीस घंटे में दोबारा भर जाता है।

ज़ोर से स्क्रब करना। स्क्रबिंग से सूजन आती है, और सूजी हुई स्किन में पोर्स ज़्यादा दिखते हैं।

मॉइस्चराइज़र छोड़ देना क्योंकि स्किन ऑयली है। ये सबसे आम गलती है। स्किन सूखेगी तो तेल की ग्रंथियां और ज़्यादा तेल बनाएंगी, और पोर्स और भरेंगे।

टूथपेस्ट, बेकिंग सोडा और नींबू। तीनों स्किन का pH बिगाड़ते हैं। नींबू लगाकर धूप में जाने पर तो पिगमेंटेशन तक हो सकता है।

नाखून से पोर्स दबाकर निकालना। दबाने पर पोर्स की दीवार अंदर से फट सकती है, और वहां स्थायी गड्ढा बन जाता है। वो निशान पोर्स से कहीं ज़्यादा मुश्किल से ठीक होता है।

क्या मुल्तानी मिट्टी और घरेलू नुस्खे ओपन पोर्स कम करते हैं?

ये सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है, तो सीधा जवाब।

मुल्तानी मिट्टी अस्थायी रूप से तेल सोख लेती है और स्किन कुछ घंटों के लिए मैट लगती है। इतना फायदा असली है। लेकिन इससे पोर्स का साइज़ नहीं बदलता, और ज़्यादा इस्तेमाल से स्किन रूखी होकर उल्टा और तेल बनाने लगती है।

Benefits of Multani Mitti for Face and Skin

अगर आप इसे रूटीन में रखना चाहती हैं तो हफ्ते में एक बार, सही तरीके से। पूरा तरीका और सावधानियां मुल्तानी मिट्टी के फायदे और इस्तेमाल में दी गई हैं।

बाकी नुस्खों के लिए ग्लोइंग स्किन के घरेलू उपाय देख सकती हैं, लेकिन याद रखिए — ये स्किन को अच्छा महसूस कराते हैं, पोर्स के साइज़ पर इनका प्रमाणित असर नहीं है। असली काम नियासिनामाइड, BHA, रेटिनॉल और सनस्क्रीन ही करते हैं।

प्रोडक्ट खरीदते समय लेबल पर क्या देखें

खरीदते समय तीन शब्द देख लीजिए। Non-comedogenic मतलब पोर्स बंद नहीं करेगा। Oil-free या gel-based ऑयली स्किन के लिए। और सनस्क्रीन में broad spectrum हो, ताकि UVA और UVB दोनों से बचाव हो।

अगर किसी मेकअप या स्किनकेयर प्रोडक्ट पर इनमें से कुछ नहीं लिखा, तो पोर-प्रोन स्किन के लिए उसे छोड़ दीजिए।

डर्मेटोलॉजिस्ट के पास कब जाना चाहिए

  • तीन से चार महीने सही रूटीन के बाद भी कोई फर्क न दिखे।
  • साथ में गहरे, दर्द वाले मुंहासे हों।
  • पोर्स असल में आइस-पिक स्कार यानी मुंहासों के पुराने निशान लग रहे हों, क्योंकि वो सिर्फ प्रोफेशनल ट्रीटमेंट से ठीक होते हैं।
  • पीरियड्स अनियमित हों और साथ में अचानक तेल बढ़ गया हो, क्योंकि ये PCOS का संकेत हो सकता है, जिसका इलाज स्किन से नहीं हॉर्मोन से होता है।

निष्कर्ष

ओपन पोर्स मिटाए नहीं जा सकते, लेकिन उन्हें काफी हद तक छिपाया और कम किया जा सकता है। तीन चीज़ें याद रखिए — सुबह नियासिनामाइड और सनस्क्रीन, रात को बारी-बारी से रेटिनॉल और सैलिसिलिक एसिड, और हर हाल में मॉइस्चराइज़र।

आठ हफ्ते दीजिए, फोटो खींचते रहिए, और बीच में रूटीन मत बदलिए। यही सबसे बड़ा फर्क डालता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. क्या ओपन पोर्स हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं?
नहीं। पोर्स स्किन का ज़रूरी हिस्सा हैं और उनका साइज़ काफी हद तक जेनेटिक होता है। लेकिन सही रूटीन से वो 20 से 25 प्रतिशत तक कम दिख सकते हैं, और क्लिनिक ट्रीटमेंट जोड़ने पर सुधार और बढ़ जाता है।

Q. ओपन पोर्स कम होने में कितना समय लगता है?
सैलिसिलिक एसिड से दो से तीन हफ्तों में स्किन साफ महसूस होने लगती है। नियासिनामाइड का ऑयल कंट्रोल आठ हफ्ते में दिखता है। रेटिनॉल के असली नतीजे बारह हफ्ते बाद आते हैं। जल्दबाज़ी सबसे बड़ी दुश्मन है।

Q. क्या नियासिनमाइड और सैलिसिलिक एसिड साथ लगा सकते हैं?
हां, लेकिन अलग समय पर बेहतर है। नियासिनामाइड सुबह, सैलिसिलिक एसिड रात को। साथ लगाने से नुकसान नहीं होता, बस जलन की संभावना बढ़ जाती है।

Q. ओपन पोर्स के लिए सबसे अच्छा घरेलू नुस्खा कौन सा है?
सीधा सच ये है कि किसी भी रसोई के नुस्खे का पोर्स के साइज़ पर प्रमाणित असर नहीं है। मुल्तानी मिट्टी कुछ घंटों के लिए तेल सोख लेती है, बस इतना। असर नियासिनामाइड, सैलिसिलिक एसिड, रेटिनॉल और सनस्क्रीन से ही आता है।

Q. क्या ओपन पोर्स सिर्फ ऑयली स्किन वालों को होते हैं?
नहीं। ऑयली स्किन में ये ज़्यादा दिखते हैं, लेकिन उम्र और सन डैमेज की वजह से ड्राई स्किन में भी पोर्स फैल जाते हैं।

Q. प्रेग्नेंसी में ओपन पोर्स का इलाज कैसे करें?
रेटिनॉल पूरी तरह बंद कर दीजिए। नियासिनामाइड और सनस्क्रीन आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन कोई भी नया प्रोडक्ट शुरू करने से पहले अपनी डॉक्टर से पूछ लीजिए।

Q. मेकअप से ओपन पोर्स कैसे छिपाएं?
सिलिकॉन बेस्ड प्राइमर लगाइए, जिसमें dimethicone हो। फिर हल्का फाउंडेशन थपथपाकर लगाइए, रगड़कर नहीं। भारी फुल-कवरेज फाउंडेशन पोर्स में भरकर उन्हें और उभार देता है।

Q. नाक के पोर्स सबसे बड़े क्यों दिखते हैं?
नाक पर तेल की ग्रंथियां चेहरे के बाकी हिस्सों से ज़्यादा घनी होती हैं, इसलिए वहां सीबम ज़्यादा बनता है और प्लग जल्दी बनते हैं। इसीलिए T-ज़ोन पर अलग से ध्यान देने की ज़रूरत पड़ती है।

Sources

  1. What can treat large facial pores — American Academy of Dermatology
  2. Enlarged facial pores: contributing factors and treatment modalities — NCBI PMC
  3. Facial pore enlargement: treatment review — NCBI PMC

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